ये है इन्शान इस युग का

हम दूसरों के दुःख देख के दुःखी होते है, और उनकी छोटी सी परेशानी को सुनकर बहुत बुरा लगता है ।  उन्हें अपने परिवार की चिंता नहीं होती, जो आपके करीब है वो कितना परेशान है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता ।

ये है इन्शान इस युग का ।

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